सरकार देगी जमीन, बिल्डर घर बनाएंगे, खर्च भी खुद निकालेंगे


सुधीर निगम | भाेपाल . सरकार बिना राशि खर्च किए आवासहीनों के लिए मकान बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें जमीन सरकार देगी और बिल्डर उस पर मकान बनाकर जरूरतमंदों को देंगे। साथ ही, बची जमीन का कमर्शियल उपयाेग कर बिल्डर अपना खर्च निकाल सकेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री आवास मिशन के तहत एक नया ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। सरकार काे उम्मीद है कि इस फैसले से जरूरतमंदाें काे समय पर सरकारी अावास मिल सकेंगे, साथ ही राजस्व में भी बढ़ाेतरी हाेगी। इसके अलावा, सरकारी जमीन पर काबिज भूमिहीनों को पट्‌टे देने की कवायद भी चल रही है। 


ड्राफ्ट में इसके लिए भी योजना है। इसमें पट्‌टे के साथ हितग्राहियों को मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपए देने का प्रावधान होगा। पीएमएवाय में उन्हें ही यह सहायता मिल पाती है, जिनके पास अभी खुद की जमीन हो।


विशेषज्ञ तय करेंगे कीमत
जमीन की लोकेशन के अनुसार प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। जहां ज्यादा कीमती जमीन होगी, वहां बिल्डर से ज्यादा पैसे लिए जाएंगे और जहां कम कीमत होगी, वहां कम राशि ली जाएगी। यह तय करने के लिए विशेषज्ञों की समिति होगी। इसमें सिटी प्लानिंंग, राजस्व, वित्त आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे।


बिल्डर की जिम्मेदारी
मिशन में जगह के अनुसार प्रोजेक्ट बनाया जाएगा। जिस क्षेत्र में काम होगा, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की जिम्मेदारी बिल्डर की होगी। सड़क, नाली, पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं उसे उपलब्ध कराना होंगी।


ड्राफ्ट में तीन बिंदुअाें पर फाेकस



  •  सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना काे मुख्यमंत्री आवास मिशन से जाेड़कर ड्राफ्ट तैयार कर रही है। इसमें खासतौर पर तीन बिंदुओं पर फोकस किया जा रहा है। 

  •  पहला- पीपीपी मॉडल, जिसमें बिल्डर को जमीन देकर मल्टी स्टोरी तैयार करवाई जाएंगी। बदले में बिल्डर को कुछ जमीन देंगे। वो वहां मास्टर प्लान के मुताबिक कमर्शियल या रेसीडेंशियल उपयोग कर खर्च निकालेंगे। 

  •  इसमें प्रशासन और बिल्डर के बीच एग्रीमेंट होगा और पूरी जमीन एक साथ नहीं दी जाएगी। जितना काम होता जाएगा, उसके हिसाब से आवंटन होगा। 

  •  एक अन्य योजना में स्लम एरिया पर फोकस रहेगा। यहां बिल्डर मल्टी स्टोरी बनाकर उन्हें हितग्राहियों को देगा और किश्त के रूप में उनसे मासिक किराया लेगा। 

  •  उसकी किश्त पूरी होने पर मकान हितग्राही के नाम हो जाएगा। इसमें भी बनाने वाले को कमर्शियल उपयोग के लिए भूमि दी जाएगी।